मथुरा पुरी में प्राचीन अंतर्गृही परिक्रमा, हरिनाम संकीर्तन से गुंजा हृदय स्थल क्षेत्र

 

धर्माचार्यों के सानिध्य में हजारों श्रद्धालु हुए सहभागी, सभी प्राचीन मंदिरों में अन्नकूट प्रसाद अर्पित

मथुरा।माघ मास के शुभारंभ पर मथुरा पुरी बृजमंडल तीर्थ क्षेत्र में वैदिक परंपरा एवं पुराणों में वर्णित प्राचीन अंतर्गृही परिक्रमा श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ संपन्न हुई। संत-महंतों, धर्माचार्यों एवं भागवताचार्यों के सानिध्य में हजारों श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन करते हुए मथुरा के पौराणिक हृदय स्थल क्षेत्र की परिक्रमा कर धर्मलाभ अर्जित किया।

श्री यमुना महारानी के पावन तट, पुण्यतीर्थ विश्राम घाट से वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य पूजन-अर्चन के साथ परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। इस आयोजन का उद्देश्य मथुरा पुरी की आदि सनातन संस्कृति, ऐतिहासिक देवस्थलों के संरक्षण-संवर्धन तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को मथुरा के सांस्कृतिक एवं पौराणिक महत्व से अवगत कराना रहा।

वेकअप वेलफेयर फाउंडेशन, मुंबई-मथुरा के संयोजन में तथा गो.वा. श्री दीनानाथ चौगानी (गिरधर मुरारी परिवार) की पावन स्मृति में आयोजित इस अंतर्गृही परिक्रमा में श्रद्धालु श्री कृष्ण-बलराम, श्री चर्चिका देवी, पिपलेश्वर नाथ महादेव, वेणी माधव, श्यामा-श्याम, श्री शत्रुघ्न जी मंदिर, गोपाल वैष्णव पीठ, वीरभद्रेश्वर महादेव, श्री नृसिंह जी मंदिर, पद्मनाभ मंदिर, श्री दीर्घ विष्णु मंदिर, केशव देव, द्वारिकाधीश, स्वेत एवं आदि वाराह, दशभुजी गणेश सहित अनेक प्राचीन देवस्थलों के दर्शन करते हुए पुनः पुण्यतीर्थ विश्राम घाट पहुंचे, जहां परिक्रमा का समापन हुआ।

परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं का घर-घर से पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। हरिनाम संकीर्तन से संपूर्ण हृदय स्थल क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। आयोजन मंडल द्वारा मार्ग में स्थित सभी प्राचीन मंदिरों में अन्नकूट प्रसाद अर्पित कर विधिवत पूजन किया गया।

परिक्रमा में श्री गोपाल वैष्णव पीठाधीश्वर श्री श्री 108 श्री यदुनंदन महाराज, कुंज किशोर ‘भूरा बाबा’, श्री कांत बाबा, आचार्य रमाकांत गोस्वामी, चतुर्वेदी समाज के सरदार कान्तानाथ चतुर्वेदी, पूर्व राज्यमंत्री रविकांत गर्ग सहित संत, विद्वान आचार्य एवं सामाजिक संगठनों के गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

श्री यमुना महारानी का पूजन-अर्चन ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी के नेतृत्व में मथुरा पुरी के वैदिक विद्वानों द्वारा संपन्न कराया गया।

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